
चिंता हम सभी के जीवन का हिस्सा है—कभी भविष्य को लेकर, कभी रिश्तों को लेकर, कभी काम या पढ़ाई को लेकर। लेकिन जब “क्या होगा?”, “अगर ऐसा हो गया तो?” और “मैं इसे संभाल पाऊँगा/पाऊँगी?” जैसे सवाल मन में लगातार घूमते रहें, तो चिंता हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को प्रभावित करने लग सकती है। इस समूह में हम चिंता को समझने, उसके पीछे चल रहे विचारों और भावनाओं को पहचानने और उसे अधिक प्रभावी ढंग से संभालने के तरीकों पर साथ मिलकर काम करेंगे।
Counsellor
Masters in Counseling Psychology, Diploma in Guidance and Counseling from NCERT
Hindi; English